महागठबंधन रोकेगा 2019 में मोदी की जीत

संघर्ष कुमार

उत्तर प्रदेश के कैराना, गोरखपुर, फुलपुर लोकसभा क्षेत्र के उप-चुनाव में बीजेपी की हार, बिहार के विधानसभा और लोकसभा उप-चुनाव में बीजेपी+जेडीयू की हार, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी की करारी हार, राजस्थान लोकसभा उप-चुनाव में बीजेपी की हार और पिछले दिनों हुये कई अन्य राज़्यों के उपचुनावों में एनडीए व् बीजेपी की हार के बाद कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों को मोदी को आगामी आम चुनावों में परास्त करने का फार्मूला मिल चूका है। विपक्षियों की एकजुटता मोदी को दुबारा प्रधानमंत्री बनने से रोक सकती है। इसलिये कांग्रेस संभावित महा गठबंधन का रास्ता तैयार कर रही है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस द्वारा कश्मीर, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल सहित 13 राज़्यों में स्थानीय राजनीतिक दल महा गठबंधन बना सकते है।*

1. जम्मू कश्मीर        एनसी+कांग्रेस
2. उत्तर प्रदेश          कांग्रेस+बसपा+सपा+एलडी
3. हरियाणा             इनेलो+कांग्रेस
4. बिहार                आरजेडी+कांग्रेस
5. झारखण्ड           जेएमएम+कांग्रेस
6. प.बंगाल            टीएमसी+कांग्रेस
7. महाराष्ट्र             एनसीपी+कांग्रेस
8. कर्नाटक             जेडीएस+कांग्रेस
9. तमिलनाडू           डीएमके+कांग्रेस
10.आंध्र प्रदेश         टीडीपी+कांग्रेस
11. तेलंगाना          टीआरएस+कांग्रेस
12. केरल              सहयोगी दल+कांग्रेस

*अगर यह महा गठबंधन बना तो इन राज्यो में मौजूद 369 लोकसभा सीटों पर बीजेपी के लिये जीत बहुत मुश्किल होगी। एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक यह महा गठबंधन यूपी की 80 में से 61, कर्नाटक की 28 में से 22, झारखण्ड की 14 में से 11 और हरियाणा की 10 में से 10 लोकसभा सीटें जीत सकता है। इसके अलावा मध्य प्रदेश की 29, राजस्थान की 25 और छत्तीसगढ़ की 11  लोकसभा सीटों पर बीजेपी को नुकसान होने का अनुमान है। क्योकि इन राज़्यों में नवम्बर 2018 में विधानसभा चुनाव होंगे और सभी चुनाव सर्वे बीजेपी के खिलाफ और कांग्रेस के पक्ष में बताये जा रहे है।  गत विधानसभा चुनाव में पंजाब में बीजेपी को 10 वर्षो पुरानी सरकार गवानी पड़ी। इसलिये यहाँ की 13 लोकसभा सीटो में भी  चुनाव के दौरान बीजेपी को कुछ खास नहीं मिलेगा। गोवा और पांडिचेरी
में बेशक कांग्रेस ने सरकार नहीं बनाई लेकिन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा था। गुजरात विधानसभा चुनाव में  कांग्रेस को 22 सीटे अधिक मिली थी। जबकि बीजेपी की 19 सीटें कम रही।
बीजेपी की जीत उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उड़ीसा, गुजरात,  पूर्वोत्तर राज़्यों, दिल्ली,  और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों तक सिमट सकती है। यह कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस+महा गठबंधन को 330 सीटें मिलेगी। वही बीजेपी+ एनडीए 200 सीटों तक सिमट कर रह जायेगी।
मोदी को हराने के लिये कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टिया बड़े-बड़े दावे कर रही है। लेकिन राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मायावती, फ़ारुख़ अब्दुल्ला, लालू प्रसाद यादव, करूणानिधि, ममता बनर्जी, सीताराम येचूरी, एच.डी.देवगोणा, शरद पवार, ओम प्रकाश चौटाला, चंद्रबाबू नायडू सरीखे नेताओं को यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिये कि अपने-अपने निजी स्वार्थो को त्यागना होगा। तभी महा महाबंधन का रास्ता खुलेगा। वर्ना मोदी को हराना संभव नहीं होगा। क्योकि वोट बैंक का बिखराव होते ही बीजेपी जीत जायेगी और 350 लोकसभा सीट जीतने से बीजेपी को कोई नहीं रोक सकता। इस बात को विपक्षियों को समझना होगा। यहाँ मोदी के विरोधियों के लिये राहत की बात यह भी है कि एनडीए का हिस्सा रही जम्मू कश्मीर से पीडीपी महाराष्ट्र से शिव सेना और आंध्र प्रदेश से चंद्रनायडू बाबू भी मोदी के विरोधी हो चुके है। बिहार में भी मोदी और नितीश कुमार के रिश्तों में दरार पड सकती है। क्योकि नीतिश कुमार 16 लोकसभा सीट मांग रहे है। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन नहीं था और एनडीए के पास 32 सीटे थी। नीतीश सभी सीटों कर चुनाव लड़े थे वे सिर्फ दो जीते थे। इन परिस्थितियों में नहीं लगता कि नीतीश को 16 सीटें मिले। यह तभी संभव होगा जब बीजेपी द्वारा उपेन्द्र कुशवाह और रामविलास पासवान की सीटे कम की जाए। बिहार में कुशवाह के तीन और पासवान के छह सांसद है।
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