प्रोस्टेट कैंसर से मुकाबलाः खतरनाक बीमारी से बचाव और उपचार

नई दिल्ली। जब आप प्रोस्टेट कैंसर की बात करते हैं तो उम्र मायने नहीं रखती है क्योंकि यह एक ऐसा कारण है जो पुरुषों में एक गंभीर बीमारी के पनपने में मददगार होते हैं। कैंसर एक ऐसी स्थिति है जब शरीर अनिश्चित तरीके से कोशिकाओं का उत्पादन करना शुरू कर देता है। प्रोस्टेट कैंसर की शुरूआत तब होती है जब प्रोस्टेट ग्लैंड में कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ना शुरू कर देती हैं।
प्रोस्टेट पुरुषों में एक ऐसी ग्रंथि होती है जो प्रजनन में समर्थन मुहैया कराती है। यह ग्रंथि सेमीनल फ्लूइड की आपूर्ति करती है जो पुरुषों में शुक्राणु को गति करने और उनके अस्तित्व को बनाए रखने में मदद करता है। प्रोस्टेट कैंसर पूरी दुनिया में पुरुष आबादी में तेजी से बढ़ती बीमारी है, आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में बढ़ते हर प्रकार के कैंसरों में से प्रोस्टेट एक महत्वपूर्ण कैंसर है।
डॉ. गगन सैनी, प्रमुख सलाहकार, ऑन्कोलॉजी विभाग, मैक्स हेल्थकेयर ने कहा कि शोध से पता चलता है कि प्रोस्टेट दिल्ली, कोलकाता, पुणे और तिरुअनंतपुरम जैसे बड़े भारतीय शहरों में पुरुषों के बीच दूसरा प्रमुख साइट है, बेंगलुरू और मुंबई जैसे शहरों में कैंसर का तीसरा प्रमुख साइट है। इसके अलावा चेन्नई जैसी जगहों में बीते वर्षों में आंकड़ों के लिहाज से तेजी का रुझान देखने को मिल रहा है।
शोध से एक चैंकाने वाले तथ्य का पता चलता है कि प्रोस्टेट कैंसर पूरी दुनिया में कैंसर का दूसरा सबसे सामान्य कारण है और आशंका है कि 2030 तक 17 लाख नए मामले बढ़ जाएंगे और इसका सामान्य कारण वैश्विक आबादी में वृद्धि और उम्र में बढ़ोतरी है।
डॉ. गगन सैनी ने कहा कि अब तक की गई जांच से पता चला कि उम्र एक प्रमुख कारण है और इसकी पुष्टि भी की गई है। हालांकि यह एक प्रमुख कारण है लेकिन एकमात्र कारण नहीं है। पारिवारिक इतिहास जैसे कई कारक भी है। इसके अलावा जीवनशैली और खानपान की आदतें अन्य कारणों में प्रमुख हैं।
सावधान रहने के लिहाज से आवश्यक लक्षणों के बारे में विस्तार से बताते हुए डॉ. गगन सैनी ने कहा कि हालांकि बार-बार पेशाब करने की जरूरत और खास तौर पर रात में और कई बार तत्काल जरूरत महसूस होना, पेशाब करने की जरूरत को रोकने में मुश्किल, पेशाब करने में प्रवाह का रुकना, पेशाब करते हुए जलन महसूस करना प्रोस्टेट कैंसर की ओर इशारा कर सकते हैं लेकिन ये सभी लक्षण किसी बीमारी को ही नहीं बताते हैं और प्रोस्टेट के बड़े होने के मामले में भी ऐसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। यह जानना जरूरी है कि ये डायबिटीज और कई अन्य दशाओं के भी कारण हो सकते हैं। उपयुक्त काउंसिलिंग और जानकारी जुटाने के बाद 70 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में फिलहाल पीएसए स्क्रीनिंग की सलाह दी जाती है। इस आयु समूह के लिए यह सलाह दी जाती है कि वे रक्त में कुल पीएसए स्तर का वार्षिक विश्लेषण कराएं जिससे बढ़ी मात्राओं को मापा जा सके और बढ़ोतरी की गति को समझा जा सके जिससे उन मरीजों में बायोप्सी की पेसकस कराने के बारे में उचित निर्णय लिया जा सके। बीमारी के बारे में जागरूकता और खास तौर पर जब व्यक्ति का पारिवारिक इतिहास हो, परिवार में प्रोस्टेट कैंसर के बारे में जानकारी हो तो खास तौर पर युवाओं में जागरूकता इन लक्षणों को समझने में मददगार हो सकती है। कुछ अन्य लक्षणों में पेशाब या सीमेन में खून आना, रेक्टम में दबाव या दर्द और पीठ के निचले हिस्से, जांघ, पेल्विस और कमर में दर्द या अकड़ महसूस होना शामिल है।
डॉ. सैनी ने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर से बचाव की भी संभावनाएं हैं। हालांकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि खानपान की कुछ चीजों से बचने या अपने खानपान में उन्हें शामिल करने से बीमारी से निश्चित तौर पर बचाव होगा। उन्होंने कहा कि इसके बचाव के लिए व्यक्ति को कम वसा वाला भोजन करना जरूरी है, उन्हें जानवरों के मुकाबले साग सब्जियों से वसा खाना चाहिए या हर दिन फल और सब्जियों का उपभोग बढ़ाना, मछली खाना चाहिए क्योंकि मछली में ओमेगा 3 के साथ अच्छा वसा होता है जो बचाव में मदद करता है। डेयरी या डेयरी उत्पादों का सीमित उपभोग भी बचाव में योगदान दे सकता है। अच्छी तरह व्यायाम करने और सीमित दायरे में सप्लिमेंट्स लेने से बचाव में मदद मिल सकती है।

Categories: स्वास्थ्य

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