बुराड़ी कांड मनोविकार का है परिणाम : निमेष जी देसाई

मो. अनस सिद्दीकी

नई दिल्ली। मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (IHBAS)के निदेशक निमेष देसाई ने आज ‘इंडियन वुमेन प्रेस कार्पस’ में आयोजित एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की मौत के मामले में सामने आ रही दो तरह की बातों को अलग-अलग देखने की बजाय मिलाकर देखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि बुराड़ी कांड में एक संभावना यह जताई गई है कि मृतकों ने आध्यात्मिक विश्वास के वशीभूत होकर खुदकुशी की होगी। दूसरी संभावना यह जाहिर की जा रही है कि मृतकों ने मनोवैज्ञानिक विकार के कारण आत्महत्या की होगी।    दिल्ली पुलिस ने बुराड़ी कांड में एक जुलाई को मृत पाए गए 11 लोगों की मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी कराने का फैसला किया है।  इस बारे में देसाई ने कहा कि ऐसा करना काफी मुश्किल होगा क्योंकि उस मकान में रह रहे परिवार का कोई सदस्य जीवित नहीं बचा। मनोवैज्ञानिक ऑटोप्सी में यह देखा जाता है कि व्यक्ति अपनी मृत्यु से पहले के क्षणों में किस मनोदशा में रहा होगा।
यह ऑटोप्सी मृतकों के परिजन, सामाजिक संपर्क में रहे व्यक्तियों और अन्य चीजों से प्राप्त जानकारी के जरिए की जाती है। इसमें मृतकों की कुछ हफ्ते या कुछ महीने पहले की मनोदशा जानने की भी कोशिश की जाती है।   देसाई ने कहा, ‘‘लेकिन यहां मुश्किल यह है कि यह सिर्फ किसी एक व्यक्ति की बात नहीं है बल्कि 11 सदस्यों की बात है और उस मकान में रहने वाला परिवार का कोई सदस्य जीवित नहीं है, जिसके कारण स्थितियों को सीमित रूप में ही रूपांतरित किया जा सकेगा। बहरहाल, लिखित रिकॉर्ड काफी हैं जिनके विश्लेषण से पुलिस के अब तक के निष्कर्षों की पुष्टि हो सकेगी।’
देसाई का  मानना है, ‘‘कई साल तक आध्यात्मिक आस्था और रीति – रिवाजों को लेकर पूरे परिवार में बहुत ठोस सामूहिक संबंध होने के कारण घर में प्रभाव रखने वाले एक सदस्य की मानसिक बीमारी को इसमें आसानी से साथ मिल गया।’   बुराड़ी कांड के संदर्भ में देसाई ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल कानून 2017 पर फिर से विचार करने की जरूरत पर जोर दिया। जो कि केंद्र सरकार ने हाल ही में इंट्रो ड्यूस किया है। उन्होंने कहा कि इससे किसी मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति का इलाज मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘बुराड़ी कांड नीति बनाने वालों, डॉक्टरों, न्यायपालिका, पुलिस और समाज के लिए जागने का वक्त है ताकि वे मानसिक रूप से बीमार लोगों को बगैर देखभाल या इलाज के नहीं छोड़ें।’

Categories: क्राइम न्यूज,स्वास्थ्य

Leave A Reply

Your email address will not be published.