अफ़ग़ानिस्तान की कतार में भारत

उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक को रिपोर्ट में उन 10 राज्यों में रखा गया है जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता ख़तरे में है, बाक़ी 19 राज्यों के बारे में कहा गया है कि वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यक स्वतंत्र हैं.
यूएससीआइआरएफ़ ने इस साल 12 देशों को टियर-2 में रखा है जिन्हें ‘कंट्रीज़ ऑफ़ पर्टिकुलर कन्सर्न’ या सीपीसी कहा जाता है, यानी ऐसे देश जिनकी हालत ख़ास तौर पर चिंताजनक है. ये देश हैं– अफ़ग़ानिस्तान, अज़रबैजान, बहरीन, क्यूबा, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया, इराक़, कज़ाकस्तान, लाओस, मलेशिया और तुर्की.
रिपोर्ट में कहा गया है, “प्रधानमंत्री हिंसा की निंदा तो करते हैं लेकिन उनकी ही पार्टी के लोग अतिवादी हिंदू संगठनों से जुड़े हुए हैं और उनमें से कई लोग धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भेदभाव से भरी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. भारत सरकार के अपने आँकड़े बताते हैं कि सांप्रदायिक हिंसा बढ़ रही है लेकिन मोदी प्रशासन ने इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया है.”
‘धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमला रोकने में नाकाम रही है मोदी सरकार’: ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट

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